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उत्तर प्रदेश: सहारनपुर के महापौर बोले- बाबा साहेब के संविधान की शक्ति से मिली महापौर की कुर्सी
- Photo by : social media
विस्तार
उत्तर प्रदेश: सहारनपुर मेला गुघाल के सांस्कृतिक कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत सोमवार, 12 अक्टूबर को जीआईसी सभागार में नगर निगम की ओर से ‘एक शाम संविधान निर्माता के नाम’ कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों, संविधान में उनके योगदान और सामाजिक समानता के संदेश को याद किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ भगवान बुद्ध और भारत रत्न डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं के समक्ष दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस दौरान अपर जिला जज बिजनौर सुंदरलाल, सतीश आजाद, सपा एससी-एसटी प्रकोष्ठ के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल भारती, जाटव महासभा के अध्यक्ष सुदेश जाटव, कार्यक्रम संयोजक पार्षद स्वराज सिंह, सह संयोजक नितिन जाटव, उपसभापति मयंक गर्ग, मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष दिग्विजय चौहान सहित अन्य अतिथि मौजूद रहे। भंते धम्म सागर ने तथागत बुद्ध की वंदना की। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने भगवान बुद्ध के करुणा, अहिंसा और शांति के संदेश को आगे बढ़ाया तथा मानवता और सामाजिक विकास के लिए शिक्षा को महत्वपूर्ण आधार बनाया। सहारनपुर के महापौर डॉ. अजय कुमार ने भगवान बुद्ध और डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमाओं पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान के निर्माण में बाबा साहेब का योगदान अद्वितीय है। उन्होंने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के मूल्यों को लोकतांत्रिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण स्थान दिया। महापौर ने कहा कि बाबा साहेब के संविधान की शक्ति के कारण ही वह महापौर की कुर्सी तक पहुंचे हैं। अपर जिला जज सुंदरलाल ने कहा कि बाबा साहेब ने अपना पूरा जीवन सामाजिक समानता, न्याय और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए समर्पित किया। उन्होंने शिक्षा को सामाजिक परिवर्तन का सशक्त माध्यम बनाया। वहीं, सतीश आजाद ने कहा कि बाबा साहेब केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचार हैं, जो भेदभाव रहित समाज के निर्माण की प्रेरणा देते हैं। राहुल भारती ने बाबा साहेब के जीवन को संघर्ष, ज्ञान और दृढ़ संकल्प का उदाहरण बताया। कार्यक्रम संयोजक स्वराज सिंह और सह संयोजक नितिन जाटव ने अतिथियों को पगड़ी पहनाकर और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया। मनजीत मेहरा और सविता अंबेडकर ने बाबा साहेब के विचारों पर आधारित गीत प्रस्तुत किए, जिन्हें श्रोताओं ने सराहा। कार्यक्रम का संचालन रविप्रकाश बौद्ध और संजय जाटव ने किया।