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उत्तर प्रदेश: दशहरा पर वीर रस, हास्य-व्यंग्य और श्रृंगार रस की कविताओं ने बांधा समां, आसपास के गांवों से पहुंचे सैकड़ों श्रोता
- Photo by : social media
संक्षेप
उत्तर प्रदेश: मुरैना पोरसा से करीब छह किलोमीटर दूर ग्राम रजौधा में मंगलवार को दशहरा के पावन अवसर पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। देर रात तक चले इस साहित्यिक कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए नामचीन कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
विस्तार
उत्तर प्रदेश: मुरैना पोरसा से करीब छह किलोमीटर दूर ग्राम रजौधा में मंगलवार को दशहरा के पावन अवसर पर अखिल भारतीय कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। देर रात तक चले इस साहित्यिक कार्यक्रम में देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए नामचीन कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कवियों ने वीर रस, हास्य-व्यंग्य, श्रृंगार रस और गीतों की प्रस्तुतियों से कार्यक्रम में उत्साह का माहौल बनाए रखा। कवि सम्मेलन में लखनऊ से आईं रेखा भदौरिया ने वीर रस की कविताएं प्रस्तुत कीं। वहीं, राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित डॉ. सुनील त्रिपाठी निराला ने हास्य-व्यंग्य के जरिए श्रोताओं को खूब गुदगुदाया। दिल्ली की राधा सिंह तोमर ने श्रृंगार रस की कविताओं से समां बांधा। धौलपुर के प्रेम प्रसून और जालौन के दिनेश सेंगर ने अपने गीतों की प्रस्तुति दी। इसके अलावा भिंड के प्रदीप वाजपेयी युवराज ने हास्य रस, ग्वालियर की रवीना नरवरिया ने गीत, विपिन कुमार साहिल ने ओज रस और मुरैना के रवि सिंह तोमर ने गीतों के माध्यम से श्रोताओं का मनोरंजन किया। मुरैना के रामावतार शर्मा सांड ने हास्य-व्यंग्य, इटावा के राजीव पाठक ने वीर रस तथा राजेश सिंह तोमर दोषी ने श्रृंगार रस की कविताएं सुनाईं। कार्यक्रम का मंच संचालन डबरा के हेमंत शर्मा ने किया। कवियों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से महंगाई, देश की वर्तमान परिस्थितियों और सामाजिक बदलाव जैसे मुद्दों को उठाया। मोबाइल फोन में लगातार व्यस्त रहने वाले लोगों की आदतों पर भी व्यंग्यात्मक कविताएं प्रस्तुत की गईं। वहीं, विश्व में एकता और आपसी सद्भाव का संदेश देने वाली रचनाओं को भी श्रोताओं ने सराहा। ग्रामीणों में दिखा उत्साह, उमड़ी भीड़ दशहरा के अवसर पर आयोजित इस कवि सम्मेलन को लेकर रजौधा और आसपास के गांवों में खासा उत्साह देखने को मिला। बड़ी संख्या में ग्रामीण कार्यक्रम में पहुंचे और कवियों की प्रस्तुतियों का आनंद लिया। तालियों और उत्साहपूर्ण प्रतिक्रियाओं के बीच देर रात तक साहित्यिक महफिल जमी रही। यह आयोजन क्षेत्र के लोगों को साहित्य, हास्य, वीरता और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं से जोड़ने का माध्यम बना। कवियों की विविध प्रस्तुतियों ने विजयादशमी के उत्सव को यादगार बना दिया।