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दिल्ली: जंतर-मंतर प्रदर्शन में 500 से अधिक हिरासत में, AAP नेताओं और छात्र कार्यकर्ताओं पर की कार्रवाई
- Photo by : social media
संक्षेप
दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में हुए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने 500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर CEC के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।
विस्तार
दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ 2 अक्टूबर 2026 को जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में हुए प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस ने 500 से अधिक प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। प्रदर्शनकारी विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लेकर CEC के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। हिरासत में लिए गए लोगों में आम आदमी पार्टी (AAP) के दिल्ली अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज, संजीव झा, अनुराग ढांढा, पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी और सांसद संजय सिंह समेत विभिन्न राजनीतिक दलों एवं छात्र संगठनों के कार्यकर्ता शामिल थे। AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा समेत अन्य छात्र कार्यकर्ताओं को भी पुलिस ने हिरासत में लिया। प्रदर्शन को लेकर दिल्ली पुलिस ने पहले अनुमति नहीं दी थी। पुलिस के अनुसार, नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू थे, जिसके तहत बिना अनुमति सभा, प्रदर्शन, जुलूस और नारेबाजी पर रोक थी। पुलिस ने इसी आधार पर जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में प्रदर्शनकारियों को रोका और उन्हें बसों के जरिए अलग-अलग पुलिस थानों में ले जाया। प्रदर्शन में AAP के अलावा AISA, SFI, NSUI और अन्य छात्र एवं युवा संगठनों के कार्यकर्ता भी शामिल हुए। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांगों में SIR प्रक्रिया से जुड़े आरोपों पर कार्रवाई और मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर पारदर्शिता की मांग शामिल रही। प्रदर्शन को देखते हुए जंतर-मंतर और मध्य दिल्ली के आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई तथा कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई। दिल्ली मेट्रो ने भी नई दिल्ली जिले के आसपास कई स्टेशनों पर प्रवेश और निकास अस्थायी रूप से बंद किया था, जबकि कुछ स्टेशनों पर इंटरचेंज सुविधा जारी रही। पुलिस का कहना है कि कार्रवाई प्रतिबंधात्मक आदेशों और प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने के कारण की गई। वहीं प्रदर्शनकारी संगठनों ने इसे अपने लोकतांत्रिक विरोध के अधिकार से जोड़ते हुए विरोध जारी रखने की बात कही।